गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

चुनाव जीवन का सबसे कठीण काम
शोचो देखो और दे आओ फिर पछताओ
हर साल हर माह हर दिन तरसाओ
की कब मिलेगा एक मौका
बदलाब का
लेकिन फिर ...

नया चेहरा
नयी पार्टी
नए विचार
जाया जोश
नया गटबंधन
नया पण
नया तराना
नया समीकरण
और
फिर वही चुनाव
वाही खामोशी
वही वयवहार
और
पत्याशी की जीत
वोटर की हार
ये चुनाव है मेरे यार !

उजाला ....

एक मोमबती ले निकली हूँ । घुप अँधेरी रात है ।
मेरे लिए नही यह कोई नई बात है । सारे जग में कर दूंगी उजाला ।
हिम्मत है तो रोक कर दिखाओं ।
.................. रोशनी